इश्क़ का रंग — शायरी संग्रह
उसने पूछा — "इश्क़ किस रंग का होता है?" मैंने कहा — सुबह की पहली धूप का रंग — जो गर्म भी है, नर्म भी। बारिश की उस बूँद का रंग — जो होंठों पर गिरे और ज़ुबान को मीठा कर दे। रात के उस तारे का रंग — जो बाक़ी सबसे अलग चमके — बस तुम्हारे लिए। और कभी-कभी — आँसू का रंग। बेरंग। पारदर्शी। पर इतना भारी कि दुनिया धुँधली हो जाए। इश्क़ का कोई एक रंग नहीं — इश्क़ तो palette है, जिसमें हर रंग बसता है। पर अगर एक चुनना हो — तो वो रंग जो तुम्हारी आँखों में होता है जब तुम मुस्कुराती हो — वो रंग जिसका कोई नाम नहीं। इश्क़ का रंग — बस तुम हो।