दो दिलों की दास्तान — भाग 5
शादी के 25 साल बाद भी वो रोज़ सुबह मेरे लिए चाय बनाती है। मैं कहता हूँ, 'रहने दो, मैं बना लूँगा।' वो कहती है, 'तुम बनाओगे तो चाय नहीं, प्रयोग होगा।' यही तो प्यार है — 25 साल बाद भी वही छेड़छाड़, वही हँसी, वही गर्माहट। प्यार grand gestures में नहीं, इन छोटी-छोटी बातों में छुपा होता है। --- उसकी चिट्ठी आज भी मेरे पास है। पीली पड़ चुकी है, स्याही धुंधली हो गई है, पर हर लफ़्ज़ आज भी दिल में ताज़ा है। 'तुम्हारे बिना सूरज तो निकलता है, पर रोशनी नहीं होती। तुम्हारे बिना बारिश तो होती है, पर भीगने का मन नहीं करता।' कितना आसान था उसका प्यार, कितना सच्चा। काश मैंने उस वक़्त उसकी क़द्र की होती। --- उसकी चिट्ठी आज भी मेरे पास है। पीली पड़ चुकी है, स्याही धुंधली हो गई है, पर हर लफ़्ज़ आज भी दिल में ताज़ा है। 'तुम्हारे बिना सूरज तो निकलता है, पर रोशनी नहीं होती। तुम्हारे बिना बारिश तो होती है, पर भीगने का मन नहीं करता।' कितना आसान था उसका प्यार, कितना सच्चा। काश मैंने उस वक़्त उसकी क़द्र की होती।