मोहब्बत की राहों में — भाग 4
उसकी चिट्ठी आज भी मेरे पास है। पीली पड़ चुकी है, स्याही धुंधली हो गई है, पर हर लफ़्ज़ आज भी दिल में ताज़ा है। 'तुम्हारे बिना सूरज तो निकलता है, पर रोशनी नहीं होती। तुम्हारे बिना बारिश तो होती है, पर भीगने का मन नहीं करता।' कितना आसान था उसका प्यार, कितना सच्चा। काश मैंने उस वक़्त उसकी क़द्र की होती।