प्यार का पहला ख़त — भाग 8
बारिश की उस शाम को जब मैंने पहली बार उसे देखा, तो लगा जैसे वक़्त थम गया हो। वो कॉफ़ी शॉप के कोने में बैठी थी, किताब पढ़ रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी जो मुझे खींच रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और उसकी टेबल पर जा बैठा। 'Excuse me, यह सीट ख़ाली है?' उसने मुस्कुराते हुए कहा, 'अब नहीं।' और इसी एक पल ने मेरी पूरी ज़िन्दगी बदल दी।