Wi-Fi का पासवर्ड
हॉस्टल। रूम नंबर 304 और 305। साहिल 304 में, दीपा 305 में। दोनों के रूम की दीवार एक थी — इतनी पतली कि ज़ोर से बोलो तो सुनाई दे। पहली मुलाक़ात — Wi-Fi को लेकर। साहिल का डेटा ख़त्म हो गया था। Assignment submit करना था। उसने दीवार पर थपथपाया। "एक्सक्यूज़ मी! बग़ल वाले रूम? क्या Wi-Fi का पासवर्ड बता सकती हो?" "कौन हो तुम?" आवाज़ आई। "304 वाला। साहिल।" "पासवर्ड मैं क्यों दूँ? मैं पैसे भरती हूँ।" "प्लीज़? ज़िंदगी मौत का सवाल है। Assignment।" "... ठीक है। ILoveDosa@123" "ये पासवर्ड है?" "हाँ, मुझे डोसा बहुत पसंद है। कोई कमेंट मत करना।" साहिल हँसा। "थैंक्यू, डोसा गर्ल।" बस — शुरुआत हो गई। अगले दिन साहिल ने कैंटीन से डोसा लाकर उसके दरवाज़े पर रख दिया। नोट लगाया — "Wi-Fi के बदले।" दीपा ने अगले दिन साहिल के दरवाज़े पर चाय रखी — "डोसे के बदले।" फिर शुरू हुआ — दरवाज़े पर नोट्स। छोटे-छोटे, बेवकूफ़ी भरे। "आज तेरा गाना सुनाई दिया। बहुत ख़राब गाती है।" "तू ज़्यादा अच्छा गाता है? मैंने सुना है bathroom में।" एक महीने बाद, कॉलेज के कॉमन रूम में पहली बार सामने मिले। "तो तू है डोसा गर्ल," साहिल ने कहा। "और तू है bathroom singer," दीपा ने जवाब दिया। दोनों हँसे। बस, यही तो प्यार की शुरुआत है — हँसी। पूरा हॉस्टल जानता था दोनों के बारे में — 304 और 305 का किस्सा मशहूर था। वॉर्डन भी मुस्कुराती थीं। ग्रेजुएशन के दिन, साहिल ने दीपा को एक गिफ़्ट दिया — एक छोटा सा Wi-Fi राउटर। उस पर स्टिकर लगा था: "पासवर्ड: ILoveDeepaToo@forever" दीपा ने रोते हुए कहा — "ये सबसे बेवकूफ़ी भरा और सबसे प्यारा गिफ़्ट है।" "जैसा मैं हूँ — बेवकूफ़ और प्यारा।"