दो जिस्म एक जान — शायरी
तेरे क़रीब आता हूँ तो साँसें धीमी हो जाती हैं, जैसे वक़्त ठहर जाता है जब तू सामने आती है। तेरी आँखों में झाँकता हूँ तो ख़ुद को खो देता हूँ, तेरी बाँहों में सिमटता हूँ तो पूरी दुनिया पा लेता हूँ। तेरा हाथ जो छूता है मेरा रूह तक गर्माहट जाती है, तेरे होंठों की हँसी देखकर मेरी हर फ़िक्र मिट जाती है। तू कहती है "कुछ नहीं बदला" पर सब कुछ बदल गया है, जब से तू मिली है मुझको ये दिल मेरा सँभल गया है। तेरी ख़ुशबू बसी है साँसों में, तेरा नाम बसा है ख़यालों में, तू है तो सब कुछ है मेरा — तू नहीं तो ख़ालीपन है। हम दो जिस्म हैं पर जान एक, एक धड़कन, एक कहानी, तू मेरी, मैं तेरा — बस यही सच है, बाक़ी सब फ़ानी।