तेरे बिना अधूरा हूँ — एक कविता
तेरे बिना अधूरा हूँ मैं, जैसे चाँद बिना रात अधूरी, जैसे बादल बिना बारिश अधूरी, जैसे फूल बिना खुशबू अधूरी। तेरी याद में गुज़रती है हर शाम, तेरे बिना सूना है हर मुकाम, दिल कहता है बस तू ही मेरा, तू ही मेरी सुबह, तू ही मेरी शाम। तेरी आँखों में देखा था मैंने, अपना अक्स, अपना जहान, तेरी हँसी में छुपा था मेरा, हर ग़म का हर दर्द का निदान। जब तू पास होती है तो लगता है, दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगह यहीं है, तेरे होने से पूरा हूँ मैं, तेरे बिना ज़िंदगी बस एक सज़ा है। ऐ मेरी जान, लौट आ, ये दिल तेरा इंतज़ार कर रहा है, हर धड़कन में तेरा नाम है, हर साँस तुझे पुकार रही है। तू कहीं भी हो, सुन ले — मेरा प्यार कम नहीं होगा, ज़माने भले बदल जाएँ, पर ये दिल तेरा ही रहेगा।